women's day special
मुझे नहीं बनना गहनों और घर कि चारदीवारी में कैद स्त्री ,, मुझे बनना है एक अपने घर परिवार अपने देश का नाम रौशन करने वाली लड़की ,, मुझे नहीं बनना दिनभर अपना चेहरा चमकाती और घर में दिनभर बिस्तर में पड़ी हुई लड़की,, मैं खुश हूं अपनी किताबों और किताबों से सजी दुनिया में ,, कलम कि स्याही में मैं अपनी खुशियां ढूंढ लेने वाली लड़की हूं ,, हां मैं खुश हूं अपनी किताबों से सजी दुनिया में,, कलम से निकले अक्षरों से लिखे शब्दों कि दुनिया में ,, हां मैं व्यक्तिगत में एक ऐसी लड़की हूं कभी न हारने वाली और अपनी किस्मत खुद लिखने वाली ,, मैं खुद ढूंढ लेती हूं खुशियां कहानी के किसी अच्छे किरदार में या अंत में हां मैं लड़की हूं एक मजबूत हर हाल में हारने मानने वाली हर एक मुसीबत को गले लगाकर चलने वाली ,, हां मैं लड़की हूं ,, अपने घर कि एक ढाल हूं ,, हां मैं लड़की हूं मुझे बनना है कभी न रुकने वाली उस नदी कि तरह जो निरन्तर बहती रहती है,, अपनी एक समान गति से ,, हां मैं लड़की हूं ,, कभी न रुकने,, वाली और कभी न हार मानने वाली। (Janvi ki kalam se )✍️✍️✍️✍️🧑⚕️
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