WB MEDICAL COLLEGE INCIDENT
वो रात न जाने क्यों वो रात इतनी काली हो गई 36 घंटो से लगातार काम था एक पल भी न आराम था जब काम से फुरसत पाई मैने मां को कॉल मिलाई मां ने भावुक हो कर कॉल उठाया इतनी देर बाद जो बिटिया का कॉल आया मां को बताया कि कैसे मैंने कई जिंदगियों को बचाया उन्होंने पूछा... ये सब छोड़.. तूने कुछ खाया? इस सवाल में उत्तर में मैं पूरी तरह खाली हो गई न जाने क्यों वो रात इतनी काली हो गई। वीरान से गलियारे मुझसे कुछ कह रहे थे मानो बरसों से वो कुछ देख और सह रहे थे मन में अनहोनी की आशंका सी आई पर थकी आंखे इनसे न जीत पाई फिर आते है ढेर सारे साए कुछ अपनों के वेश में पराए मेरे हौसलों के आगे उनकी एक न चलती पर अकेली थी, क्या करती। फिर भी मैं बिल्कुल न डरी आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ी पर विफल वहां की रखवाली हो गई न जाने क्यों वो रात इतनी काली हो गई। पुष्पेश पांडेय MBBS BATCH 2021
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