गांव vs शहर
गांव में मैंने देखा अभावो में खुशिया है शहर में सब कुछ है खुशियों का अभाव है, गांव में सब खुशी से रहते है कोई क्राइम नहीं शहर में बहुत कुछ है पर अपने लिए टाइम नहीं, गांव में अच्छा खाना कोई भी यहाँ रोग नहीं शहर में बड़े बड़े घर है पर रहने को लोग नहीं, गांव में अनपढ है पर हर तरह से सुखी है शहर का क्या है यहाँ पढ़े लिखे सबसे दुःखी है, शहर के लोग पैसे में हो गए बिलकुल अंधे जो खुद गरीब हुआ करते थे उन्हें गरीब लगने लगे गंदे, शहर वाले बोले हमें तो सिर्फ काम चाहिए गांव वालो को तोह गांव वाली शाम चाहिए, शहर तो बस दिखावे का है यहाँ सबका जिगरा कच्चा है ओ शहर तुझसे तो मेरा नादान गांव अच्छा है,
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