मैं vs मैं
क्या मैं खामोश तुम्हे अच्छा लगता हूं तुम चाहते हो मैं अपनी बात नहीं कहूं तुम ऐसे ही मुझे आईने के सामने खड़ा करके एक पल खुद को खोजते हो और खो देते हो तुम्हारी अदाकारी लोगों को समझ नहीं आएगी तुम तो मुस्कुराते हो और कमबख्त रो देते हो कैसे तुम मुझे इतनी बेदर्दी से निहारते हो झूठे हो तुम मुझे जिंदा बता कर सच को मारते हो तुम अब रुक क्यों नहीं जाते.... तुम अब रुक क्यों नहीं जाते ....
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