us raat ki baat
शायद उस रात ही रुख़्सत हो जाना बेहतर था, ताकि उस रात के राज़ से वाक़िफ़ न होता। उस दिन फूल ना बनना ही क़िस्मत होती, तो आज शायद मुरझाया न होता।
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