फिर वह सीख लेता है।।
फिर आदमी सीख लेता है, कि दुनिया की रीत अलग है। वह समझ जाता है , कि उनकी परवरिश इतनी खराब क्यूं हुई। वह जान पाता है, कि उसके लिए अच्छी स्वास्थ्य सेवा क्यूं नहीं है। वह देख पाता है, कि उसके साथ हो रहे अन्याय की शिकायत के लिए कोई जगह क्यूं नहीं बनी। उसे ज्ञात होता है, कि शिक्षा इन सभी चीजों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। वह जान गया अच्छी शिक्षा न मिल पाने के कारण दुनिया अन्धविश्वास में डूबी है। वह समझ गया कि,अच्छी शिक्षा होती तो पालकों की परवरिश इतनी खराब न होती। वह समझ जाता है कि,स्कूल में गलती करने पर आर्थिक जुर्माना, लगाने के बजाय गृहकार्य या कोई अध्ययन सम्बन्धित सजा मिलती तो, आज न्यायकर्ता घूसखोर नहीं होते। वह समझ पाता है कि, अच्छी शिक्षा होती तो स्वास्थ्य सेवा में कोई कमी नहीं होती। अब वह जान गया कि शिक्षा ही जड़ है। इसलिए उन्होंने शुरुआत शिक्षा से की है।
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