किस्मत रेखा
सर झुककर चल दिए किस्मत के भरोसे खुद को आजमाने, शर्म और डर को ताला लगाके कूद गए गहरे खाई में, लहरों में खुद को समर्पण कर, आंखों की रोशनी से अंधकार को मिटा दिया और धड़कते दिल को सिखा दिया सुकून का पाठ।
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