ख्याल
यह सोच ,यह बेचैनी बहुत खौफनाक होते हैं उस वक्त के लिए.......! जिस वक्त आप खुद को खुद में ढूंढ रहे होते हैं......!! आपकी शिथिलता भरी मुस्कान आपको नोचने को दौड़ती हैं ............. आप हिसाब पाने की कोशिश करते हैं........... अपने कापते हाथों का, कुछ अधूरी रातों का, कुछ कही गई बातों का, ! अंदर में उमड़ रहे प्रेम को आप रखना चाहते हैं सहेजकर, समेटकर.........., हां शायद बहुत कुछ समेट लेना चाहते हैं अनंत काल तक के लिए ........... ठीक उसी तरह जैसे पुस्तकालय के संग्रहालय में पुस्तकें रखी जाती हैं. .......!
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