बचपन
स्कूल की उन भागम - भागी से, जिंदगी के पहलू तक, बनाती दीवारों में उन रंगों से, जिंदगी के इन रंगों तक, कितना खूबसूरत है न, जब जिंदगी यूँ रोशन हो जाये ! चलते रस्तों से झांकने से, घर पर उसको ढूढनें तक, बचपन के उस सिलसिले से, वक्त के इस सिलसिले तक, कितना सुंदर है न, जब अपनी वो यादें मिल जाये, लड़कपन की लड़ाइयों से , अब की लड़ाइयों तक, कितना अच्छा होता है न, जब हर पल बचपना बन जाये ।
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