वक़्त
*खामोशी को कमजोरी मत समझो,* *यहीं से सबसे बड़ी आवाज़ उठती है।* जो राजनीति में उलझे हैं आज, कल अपनी ही चाल में फँसते हैं। कि गड्ढा किसी और के लिए खोदोगे, तो रास्ता अपना ही धँस जाएगा। हम शोर में नहीं, कर्म में विश्वास रखते हैं, और कर्म का जवाब समय देता है। *और सुनो उकसाने वालों को बस इतना कहना —* *सबर हमारा है, फैसला वक्त तय करेगा।*
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