बैरी
बैठेंगे खयालों में, उठेंगे लड़कपन में। अच्छा है, चंचल है, नक्चड़ा है। सच्चाई से भागता है, मगर एहसास करने पर मजबूर करता है। तकिया, रजाई इसके मनपसंद है, इसका बस चले तो उन्हें के साथ ब्याह कर ले। जैसा भी है अच्छा है, सच्चाई दिखाता है। जैसा भी है अच्छा है, जीने का मतलब बताता है। ~पंख
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