काश वही दिन फिर आ जाते
काश वही दिन फिर आ जाते, वही खेल और वही तमाशे। हिलमिल कर त्योहार मनाते, तब यूँ झगड़े-दंगे ना होते। कितना प्यारा देश हमारा, विश्व पटल पर सबसे न्यारा। सर्वधर्म समभाव यहाँ का, सदा रहा है भाईचारा। किसने ये चिंगारी भड़काई, कहाँ से आए ये दंगाई। प्रेम और विश्वास जहाँ था, क्यों बन गई इतनी गहरी खाई। दुश्मन देश हैं घात लगाए, क्यों अपने ही हुए पराए। यक्ष प्रश्न गंभीर है लेकिन, कोई उत्तर अब तक न पाए। हे ईश्वर, विनती है तुमसे— दूर करो इस अंधकार को, दूर करो मन के विकार को। ऐसा कोई चमत्कार हो, मानवता फिर से बहाल हो।
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