तालीया
तालीया ====================== तालीयो की गडगडाहाट मे, आक्सर निंदा होती ही है, ये आलग बात है, की तालीयो के कारण, वह आवाज थोडी दब जाती है. महसुस करने मे और, और फॅक्ट मे बहोत आंतर है, जमी कही और आसमा कहा, मगर दोनोही आपनी जगह ठीक है. क्या वास्तव क्या अवास्तव, संभल जाये तो ठिक है, वरना निंदकोका...., शोर यहा बढने का...., आपका कीरदार कारण हे. कुछ नही भुले कृष्ण और राम, दोनोही योध्दा थे......, पर सीखा गये..... , युध्द मे सब माफ. फिर जीत के लिये, साम, दाम, दंड, भेद, हो या कुछ और, साम, दाम, दंड, भेद, हो या कुछ और. =========================
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