रहमोकरम अदा कर ना
करवट बदलने वाले ऐ वक्त, क्यों हमसे खेल रहे हो… तुम्हारे साथ चलने को भी कह रहे हो, और ये वक्त फिर से नहीं आएगा — इसका डर भी दिखा रहे हो… मसला काम और पैसों का ऐसा हुआ, कि दोस्त हमसे गुमशुदा हो गए… ये कमबख्त work shift और week off ही तो है, जो हम साथ मिल नहीं पा रहे हैं… "कभी मिलेंगे वहीं, जहाँ last time मिले थे…" कहते-कहते ज़माने गुजर रहे हैं… अब तो बस एक-दूसरे की reels देखकर, और भेजकर ही दिन गुजर रहे हैं… गालियाँ हम भूले नहीं हैं, बल्कि और भी सीख गए हैं… खुद को काम में दे-देकर… पर जिनको खुलकर गालियाँ दे सकें, उन्हें साथ रखने की — रहमोकरम अदा कर ना…
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