सुनसान सड़कें
ये सुनसान सड़के दोस्त हैं मेरी सुनती हैं मेरी अनसुनी कहानियाँ और सुन लेती हैं गहरी ख़ामोशी भी यहां खुद से मुलाकातें होती हैं मेरी बिना किसी शोर के, बिना किसी सवाल के, और न ही कोई अपेक्षा होती है। होते हैं तो सिर्फ मेरे ख़्याल, जो कभी भीड़ का हिस्सा न बन पाए। फिर यह खामोशी अकेलापन नहीं लगता एक दिल में घर-सा बन जाता है यूँ ही चलते-चलते मिल जाता है कुछ जो ढूंढने निकला ही नहीं था मैं कभी और साथ ही मिल लेता हूं खुद से भी मैं।
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