संकल्प
नियम जब तक व्यवहार न बन जाए समय-सारणी ज़ज्बात न बन जाए जब तक संकल्प में विकल्प बंद न हो तब तक अनुशासन कठोर रखना चाहिए। सफलता के लिए नियमितता जरूरी है रोज अपने हिस्से की साधना जरूरी है यूँही नहीं मिलती है सिद्धि साधक को नित ही तन मन को तपाना जरूरी है। अगर नियम टूट रहा बीच बीच में छुट रहा प्रयासों से मन हट रहा तो समझो संकल्प अधूरा है । शरीर को तो आराम चाहिए मन को इसका साथ चाहिए ये तो नित नए बहाने बनाएंगे मायावी लक्ष्य से भटकायेंगें । स्वयं से इसकी शिकायत करो अपने तन -मन से बात करो कड़े शब्दों में इनको बता तो दो फिर से प्रारम्भ अभ्यास जरूरी है।
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