जो सच्ची है, सरल है !
कैंप की भीड़ में एक चेहरा अलग सा था, बात कम हुई थी पहले, पर अपनापन पक्का सा था । एक दिन कुछ बातों ने , मन को थोड़ा तोड़ दिया, गर्ल्स ग्रुप की टोंट ने , दिल को अंदर से मोड़ दिया । तभी वो आई… बिना झिझक, बिना दिखावे के, सच्चे शब्दों से मनाया, अपने ही लगाव के। जो दिल में हो, वो मुँह पर कह देना उसकी आदत है ! अनुशासन उसकी पहचान, मदद करना उसकी इबादत है। न कोई बनावट, न कोई झूठी मुस्कान, उसकी सादगी में छुपा है , एक प्यारा सा जहान। कैंप की यादों में उसका नाम खास रहेगा, शायद उसे अंदाज़ा भी नहीं, वो कितनी अच्छी है ! पर मेरे लिए उसकी , ये सादगी ही सबसे सच्ची है ।
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