मातृभूमी का कर्ज ✍️
छोड़कर अपना हंसता हुआ सपना घर माँ की ममता को छोड़कर आये हैं, इस भारत भूमि में जन्म लेकर जन्मभूमि माँ का कर्ज चुकाने आये हैं। तपती धूप हो या बर्फीली रातें वह हर पल हर हाल में मुस्कुराते हैं, और अपनी नींद बेचकर वह पूरे वतन को सुकून की नींद सुलाते हैं। कठिनाइयों की राह में रुकना सीखा नहीं है उन्होंने, वो दृढ़ हिमालय से खड़े हैं। भारत माँ की रक्षा के लिए वह हर बार मौत से लड़े हैं। हर मुसीबत की घड़ी में वो देश की रक्षा करते हैं, नमन है उन वीरों के लिए, जो तिरंगे के लिए डटे रहते हैं। जय हिन्द जय भारत
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