शब्द.. 🌸
बहुत गलत होने पर भी सब कुछ छुपा लिया मैंने, क्योंकि हर सच लड़ने के लिए नहीं होता। बहुत कुछ लिखना था, पर हर शब्द लिखकर मिटा दिया— कभी डर से, कभी इस उम्मीद में कि शायद चुप रहना बेहतर है। खुद में इतना खोया कि खुद से ही छुपता चला गया, और अपनी ही यादों को हर दिन समझाता रहा— “अभी नहीं… बाद में।” खुद को साबित करते-करते थक गया हूँ, इतना कि अब साबित करने की इच्छा भी बोझ लगती है। अगर किसी दिन बिखरा हुआ दिखूँ, तो हैरान मत होना— वो टूटना नहीं होगा, बस बहुत देर तक जुड़े रहने के बाद रुक जाना...
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