शान
शान ==================== खुद को जरा पहचानो, आपनी शान क्या है जरा परखो, झुठी शान के पिछे मत भागो, गुजारा थोडेमेही सही....., बेपनाह आपेक्षा क्यु..., !. बढनाभी आगे है तो...., सीढीयो पे चढकर..... , लिप्ट की आशा तो चिंता बढाती है, मील भी जाये आगर तो, आपनेही पैर को खोकला बनाती है . लिप्ट का ईस्तेमाल तो बुढापे की निशानी है, पैर चालु है तो चलने दो, पैसा कामाना लेकीन..., पुरी मेहनतसे...., किसीके भरोसेपे नही...., शान माॅंबाप की बढावो.., की सी और की क्यु! . दम भरो दीलो मे ऊठो जरा....., क्यु टहलते हो झुटी शान दीखाने, जीवन क्या है पहचानो जरा...., जीवन क्या है पहचानो जरा. ========================
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
