आवतार
आवतार ============== धरती पे मीरी रास लिला, रचाता है कोई और, मै तो आवतार हु......, मेरी किस्मत की रकील, खीचता है मेरे माथे पे कोई और. मै तो साधारण सा एक अवतार, कभी कृष्ण, तो, कभी, घनशाम, कभी कन्हैया तो, कभी कान्हा. ना मै मरता ना जीताहु, ऊस विधाता के आदेश के बिना, मेर कर्म भी वोही करवाता है. ना मै यहा परिवार बचा पाया, ना मेरा वंश यदुकुल..., मै तो सिरफ आवतारहु. कठपुतलीसा...., नाम तो तुमने दिया.... तारणहार...... मै तो यहा सब हार कर ही रह गया, मीरा और राधा के बीच फस कर रह गया, मीरा और राधा के बीच फस कर रह गया. ======================
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
