हमसफ़र
मुझे समझाता है, सिखाता है, हर रोज़ पहले से बेहतर बनाता है। हमसफ़र है वो मेरा, मगर खुद को बस दोस्त बताता है। देखा है मैंने बाकियों को लड़ते-झगड़ते, ये तो बस मेरे लिए मुझसे ही लड़ जाता है। कहता है - मैं जानता हूँ तुम कर सकती हो, और यूँ ही मुझे रत्ती-रत्ती बढ़ाता है। ख़्वाहिशें मेरी पूरी करने को ख़ुदा से भी लड़ जाता है, और खुद की बारी आए तो बस मुझे समझाता है। ज़रा सी तबीयत नासाज़ हो मेरी, तो हकीमों के संग बेपनाह दुआएँ लाता है। पूछ लूँ गर - इतना प्यार क्यों करते हो? हँसकर कहता है, तुमसा अच्छा दुश्मन कहाँ मिलता है। उसकी तबीयत को गर मैं हल्के में ले लूँ, तो बच्चा बन नाराज़गी जताता है। महफ़िल में प्रतिद्वंदी, भीड़ में हमसाया बन जाता है। मुझको अपना दिन और रात बताता है, और शाम ढले यारों संग रफ़ूचक्कर हो जाता है। डाँटता भी है मुझको, और मुझी से प्यार भी लड़ाता है। हमसफ़र है वो मेरा, मगर खुद को बस दोस्त बताता है।
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