कास्तकार
कास्तकार ================== कमता कम हु फिर भी मालीक हु, पैसा तीजोरी मे बंद करने से पहले, पशु पक्षीयो पे ऊडाता हु, माॅंबाप और खुदा की ऐहीमीयत जनता हु, ईसी लिये हर काम करने से पहले, ऊनको सदा याद करके, आपने दील के तीजोरी मे...., सदा ते लिये बंद करके रखता हु. जमीन कसते कसते , परिवार और आपने आप को, कसकर रखता हु..., जरुरते मेरी बहोत है, फिर भी थोडे मे गुजारा करता हु. समजदार को ईशारा काॅफी..., खुदकी और दुसरो की कीमत जानता हु, ईसी लिये............, कुछ करने से पहले... ईशारा देता हु....., !, लोग कहते मै अन्नदाता हु..., वो तो मै खुद्द जनता हु...., फिर भी गर्मी शरीर की......, कल के लिये थोडी बचाकर रखता हू....., मै कास्तकार हु....., मै कास्तकार हु. =================
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