पसंद है।
मुझे चाँद देख उसके संग चलना पसंद है, थोड़ा अजीब है,, पर पसंद है। चकरा जाती हूं, इस कैफ़ियत में कभी-कभी, फिर चक्कर खाकर उसका हाथ पकड़ना पसंद है। आँखें दिखाकर, ख़ौफ़ दिखाकर मुझे नादान कहता है, मगर मुझे उसके साथ की यही नादानियाँ पसंद हैं। इतना बचपना क्यों, अक्सर पूछता है मुझसे, अब क्या बताऊँ, मुझे उसके साथ का यही बचपना पसंद है। और सब बातों की एक बात!!! मुझे वो पसंद है।
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