सीधा तीर
पूरी उम्र आँखें झुकाने वाले नज़रे उठाते है, सिर्फ उन्हीं के सलाम पर जिनके दिल के बाणसे तीर निकलते है सिर्फ उन्हीं के नाम की; गोपिया मिली होगी हजारों, मगर प्रेम के गीत गुनगुनाते सिर्फ उन्हीं के नाम की; हजारों अर्चन पार कर, ढूंढ लेते है रास्ता जो ले जाय घर उन्हीं के नाम का।
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