सपने
अगर सपने देखोगे नहीं तो कैसे करोगे तुम पूरे और अगर देखते ही रह जाओगे फिर भी यह रह जाएंगे अधूरे सपने देखने के लिए नहीं होते उनके लिए लगानी पड़ती है पूरी जी जान अगर एक दिन पढ़ कर आईएएस बनने का सोच लिया तो कैसे होगी इस सपने की उड़ान हर दोस्त दोस्त नहीं होता यह भी हिस्सा है इस जंग के अरे लोग तो अपनी पतंग उड़ाने के लिए पीछे पड़ जाएंगे तुम्हारी सपनों की पतंग के यह सफर किसी के लिए आसान है तो किसी के लिए मुश्किल क्योंकि इसमें चाहिए दोनों दिमाग और दिल दीवांशी का बस यही कहना है कि सपने देखना मूर्खता नहीं सपने देखकर मेहनत ना करना मूर्खता है
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