बिखरे सपने
हाथ छुटे कुछ इस तरह कि दिल में बसा प्यार लहू बनकर धरती को अपने आंसुओं से सीज गया। इतने ज़ुल्म किए कि पीछे मुड़कर देखा भी तो अपना घर नहीं अत्याचार का अड्डा नज़र आया। आँखें बंद करती तो सिर्फ दर्द का गढ़ा सामने आया, इतना भयानक कि सपनों में भी महसूस किया तो भुलाने के लिए होश गावा देने वाले नशे लगे। फिर भी हमने मुस्कुराके अपना रास्ता बनाया जिसकी मंज़िल पर सिर्फ खुशी और आजादी लिखा हो।
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