पक्की टहनियाँ
जड़ से जुड़े आसमान को छूते स्वाभिमानिक से पेड़ झुक चले अपने साथी के नाज़ुक नजरों कि इज्जत में, बह चली प्रेम की धारा ढलते सूरज के सुंदर कलियों के बीच बसाया मोर की जोड़ी ने अपना सुनहरा घर।
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