परदेस
दूर दुनिया में मोहब्बत का सिला क्या है, दिल तो जोड़ा है, मगर एहसास का सिला क्या है। तरसते रहते हैं सब अपने, अपनों के लिए, जो परदेस में बैठे हैं, उनसे पूछो वफ़ा क्या है। दुआएँ ख़ैर मक़दम की हमेशा साथ रहती हैं, ये आँख नम है, इन आँसुओं का सिला क्या है। ख़ुशियाँ हमसे रूठी हैं, वो जो दूर हैं कहीं, मेरी किस्मत में लिखी इस जुदाई की रज़ा क्या है। कोशिशें तो बहुत कीं कि हरदम क़रीब रहें, यही दुनिया है—जो बिछड़ जाए, फिर दुनिया क्या है।
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