इश्क़ अगर सवाल है
इश्क़ अगर सवाल है तो जवाब हो तुम सुकून अगर रात है तो चाँदनी हो तुम बंद आँखों में ठहरा एक ख़्वाब हो तुम इश्क़ अगर सवाल है तो जवाब हो तुम पढ़ लूँ इस ज़माने के कई किस्से कहानियाँ मैं पर जिसपे आकर ठहर जाऊँ वो किताब हो तुम अब किस दर पे जाके सर झुकाऊँ आखिर, मेरी मन्नत, मेरी आयत, मेरा सवाब हो तुम इश्क़ अगर सवाल है तो.... जवाब हो तुम उलझे हुए धागों का आसान हिसाब हो तुम मुझसे कोई पूछता है मेरे पागलपन का सबब मैं धीरे से मुस्कुरा कर कहता हूँ, जनाब वो हो तुम
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