मुलाकात हुयी.. 🌸
इस दिसम्बर उनसे मुलाक़ात हुई, सच में इक शाम हमारे नाम हुई। हम मिले छुपते–छुपाते उन नज़रों से, जिनकी बंदिशें हम पर सरेआम हुई। हम मिले नज़रों में इक दूजे की आस लेकर, जो कहने को आतुर हमारी साँस हुई। हम मिले हाथों में उपहारों का प्यार लेकर, जो हमारे इस लम्बे इंतज़ार की पहचान हुई। हम मिले सर्द रातों की एक रात में, अपने लम्बे इंतज़ार की गरमाहट लेकर। कुछ बातें हम में मयस्सर थीं, मगर हम बिस्तर न हुए। वक़्त की चलती इस रफ़्तार में कुछ लम्हे हमने चुरा लिए— और यक़ीन मानो, इससे बड़ी ग़लती हमसे इस बार नहीं हुई
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