मेरी दृष्टि और मेरा ईश्वर
"लोग कहते हैं कि मेरी दूर की दृष्टि थोड़ी कमज़ोर है, शायद वो सच ही कहते हैं... क्योंकि आसमानों में, सात आसमान पार बैठा तुम्हारा वो बताया गया 'भगवान' मुझे आज तक कभी दिखाई नहीं दिया। जिसे ढूंढने लोग मंदिरों, मस्जिदों और तीर्थों के चक्कर काटते हैं, वो अदृश्य शक्ति मेरी इन आँखों की पहुँच से हमेशा दूर ही रही। लेकिन मेरी पास की नज़र बहुत साफ़ है। मुझे भगवान को देखने के लिए किसी काल्पनिक आसमान की तरफ़ आँखें उठाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। मेरे लिए तो भगवान का साक्षात रूप वो **माता-पिता** हैं, जिन्होंने उंगली पकड़कर मुझे चलना सिखाया, अपनी खुशियाँ मारकर मेरी हर ज़िद को पूरा किया। और भगवान का दूसरा रूप मुझे उस इंसान में दिखता है, जो मेरे सबसे बुरे वक्त में, जब सबने साथ छोड़ दिया था, फ़रिश्ता बनकर आया और बिना किसी स्वार्थ के मेरा हाथ थाम लिया। ढूंढते रहो तुम पत्थरों और आसमानों में अपने रब को, मेरा ईश्वर तो मेरे अपनों के प्यार में और मुसीबत में काम आने वाले उन मददगार हाथों में साफ़ दिखाई देता है।"
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