बहती खुशिया
सज गई जिंदगी महकते फूलों के बहारों में, किस्मत चमकी ऐसे कि पैर लहराते हुए बादल पर चल रहे और मुस्कान की चमकान चेहरे को नापते हुए सीमा पार हो गई; नींद आंखों से फरार हो दिन में ही सपने दिखा दे रही और मन शरीर से जुदा हो परदेस की गलियों में फिर रहा; कोई सम्भल ले वरना अपने ही नज़र से ना छूट जाए यह चमकती किस्मत की रेखां
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