मां
मां, तेरे बिना अधूरी हैं मेरी सुबहें, तेरे होंठों की मुस्कान, चाय के पहले घूंट की तरह, गर्म और सुकून भरी। तू चुपचाप सुन लेती है, मेरे दिल की हर बात, तेरी गोद में बसी है सुरक्षा की पूरी दुनिया। जब भी मैं गिरा, तेरे हाथों ने थाम लिया। तेरा प्यार, जैसे धरती की ममता, सुख-दुख का हर पल, तेरे आँचल में छिपा। तेरे कांपते स्वर में सुनाई देती है धड़कनें मेरी, सपनों की हर परछाई में, तेरी छवि बाकी। तेरे बिना, इस सफर में, मैं बेगाना, सिर्फ एक नावगा, तेरे आशीर्वाद की लहरों में नाचता हुआ। मां, तेर ही नाम, एक उच्चारित मंत्र, हर सुबह मेरी, हर रात मेरी।
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