प्यार
जिस्मफ़रोशी की दुनिया है, रूह का ख़रीदार नहीं, हिज्र की रात में आँसुओं का कोई ग़मगुसार नहीं। तुम इश्क़ की बातें न करना, ऐ उत्पल, अब इस दौर में किसी को किसी से सच्चा प्यार नहीं।
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