जादुई प्यार
सबको पीछे छोड़ जब खुद को अपनाया तो आंखों में ऐसी चमक पढ़ी कि दुनिया के रंग बदल गए। रात के कालेपन में अब अकेलापन नही काटता और संभावना के रंगों में सुनहरे सपने सच लगने लगे। पंख लगाने में दर नहीं लगता और उद्यान भरने से पहले दो बार सोचना नहीं पड़ता। दिल खिलखिलाने लगा है और अतीत जैसे पीछे छूट गया।
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