एक दुष्ट के प्रति
अश्रद्धांजलि,एक दुष्ट के प्रति एक राष्ट्र द्रोही मरा,भारत का भार हुआ हल्का, पर इसके मरते ही, जहन्नुम में मचा तहलका। जहन्नुम में सब सहम गए, करने लगे सब सोच, पता नहीं यहां रह,क्या क्या करेगा ये नीच पोच। जो अपनी जन्मभूमि से दगा कर यहां आया है, जिसका नमक खाया,उसी को गाली दे आया है। अब इस गन्दे जहन्नुम को और ये करेगा गन्दा, पाकिस्तान में धकेल दो,उसी लायक है ये बन्दा। नरेंद्र 15.01.2024
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
