वो आये कुछ इस तरह.....
जिंदगी में वो आये कुछ इस तरह ढल गयी हो शाम जीस तरह बदली नहीं थी जिंदगी लग रहा था कुछ इस तरह नयी जिंदगी जैसे मिली हो अब ना कोई उन्मीद है ना कूछ खोने का गम सुना था वक्त बदलता है यकीन मिला के लोग भी यहां तो बदलते है क्यू जिंदगी में वो आये कुछ इस तरह ढल गयी हो शाम जीस तरह हमारी मुस्कान पर खुशीया उनकी थी अब तो आंसु की परवा कहा हसते है हस्ती पे सब यहां क्यू जिंदगी में वो आये कुछ इस तरह ढल गयी हो शाम जीस तरह परवा नहीं अकेले है हम बस खयाल कैसे रखे अब तो दुरीया इतनी यहां जलती है सिने मे चिंगारिया बुझ गये चिराग अब यहां क्यू जिंदगी में वो आये कुछ इस तरह ढल गयी हो शाम जीस तरह एक पल नहीं था बिना साथ के उनके अब तो याद भी उनसे नजर नहीं मिलाती हम थे या मिट गये कभी तो खुद्द ही हम खुदको नजर नहीं आते क्यू जिंदगी में वो आये कुछ इस तरह ढल गयी हो शाम जीस तरह वो ही तो रास्ते है बस अब हमसफर कहां पता नहीं था जनाब के नये कपडे पेहनते ही पुराणे मे बुराईया नजर आती है बहोत जल्द कभी पंछि भी नया घर बसा लेते हैं क्यू जिंदगी में वो आये कुछ इस तरह ढल गयी हो शाम जीस तरह
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