अनेकता में एकता
कविता: "हर विषय है अनमोल" कवि: विजय शर्मा एरी गणित सिखाए जोड़-घटाना, जीवन के हर मोड़ को समझाना। गिनती, समय, धन का ज्ञान, बिन इसके अधूरा हर इंसान। विज्ञान दे चमत्कारों की बात, बिजली, दवा, रॉकेट की बात। हर खोज में इसकी है रौशनी, समझ से बढ़ती जीवन की गहराई। हिंदी बोले दिल की बात, संस्कृति की प्यारी सौगात। कविता, कहानी, भावों का संसार, रच दे सपनों का सुंदर आकार। अंग्रेज़ी खोले दुनिया का द्वार, वैश्विक मंच पर बनाओ अधिकार। संचार, तकनीक, ज्ञान की चाभी, बने आत्मविश्वास की प्यारी सवारी। सामाजिक विज्ञान दिखाए राह, इतिहास, भूगोल, नागरिकता की चाह। जानो देश, दुनिया की चाल, बन जाओ जागरूक इंसान कमाल। कंप्यूटर दे डिजिटल पंख, सूचना की दुनिया करे बेअंक। कोडिंग, ऐप्स और इनोवेशन, भविष्य बने नई क्रिएशन। खेल और कला मत भूलो, तन-मन को स्वस्थ रखो, फूलो। चित्रों, सुरों में सजी दुनिया, बने जीवन की मधुर तरुणाई। हर विषय है ज्ञान का दीप, बनाता बच्चों को तेज़ और नीप। सभी विषयों को दो सम्मान, यही है शिक्षा का सच्चा ज्ञान। – विजय शर्मा एरी
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