पतन
पतन ==================== जीवन की लढाई...., संघर्ष के बीना कीस काम की, परीवारीक सुख दु:ख विना एहमीयत आदमी की की, दो टके के पायदान की. वतन और रतन का सुख छीपा है, मेहनत मे, मेहनत के बीना की कमाई, होती है हराम की. खुद्दारी की धमक मे मजा आता है, जीवन जीनेका, क्या खनक होती है, जीवन की लढाई जीनेमे. वरना यहा लाखो पडे है, लाचारी की भाषा बोल जीवन जीनेमे, पर ऊन्हे सुकून कहा...., पतनही पतन होता है, ऊनका हर रोज गली और चोराहेपर...., गली और चौराहेपर. ======================
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