कह दूँ तुमको अपना
मैं हवा सी शर्मीली तू मेरा नशा ... तू ख़्वाबों का है मंजर मैं तेरी दास्ताँ ... मैं तो एक सैलाब हूं ठहर कहीं ना पाऊँ ... तू दरिया सा शांत है तेरी लहरें क्या बन जाऊँ ... पाने के बाद तुमको मेरा कुछ ना अपना ... इतनी भी कहाँ किस्मत कह दूँ तुमको अपना ... मैं सूरज की तरह दामन को तेरे चूम लूँ ... फ़िर उसी दामन में गुल बनके खिल जाऊँ ... जुगनुओं की रंजिश में मैं तो कहीं खो जाऊँ ... तुमको ढूँढते ढूँढते खुदको ही ना पाऊँ ... खोने के बाद तुमको मेरा कुछ ना अपना ... इतनी भी नहीं हिम्मत कह दूँ तुमको अपना ...
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