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कभी मिलने अगर आयेगा वो; क्या कहेगा !! अब वफादारी की कसमें तो नहीं खाएगा वो..... हम समझते थे; हम उसको भुला सकते थे, और वो समझता था, हमें भूल नहीं पायेगा वो.... कितना सोचा था..!! पर इतना तो नहीं सोचा था; याद बन जायेगा वो... सब के होते हुए, एक रोज वो तनहा होगा..! फिर वो ढूंढेगा हमें; और नहीं पायेगा वो.....
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