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चाहिए तो, बस ऐसा साथ चाहिए,, मुसीबत मे थाम सकूँ, मैं जिसको, एक ऐसा बस हाथ चाहिए,,। कह सकूँ, मैं जिससे मन की हर एक बात,, मेरा डर, नादानिया और हर एक जज्बात हर तकलीफ़ में उसको कहना भी ना पड़े,, बिन बोले ही जो, मेरी आँखो से सब पढ़ ले हर ख़ुशी मे साथ जिसके,, खिलखिलाकर मैं हँस सकूँ, और हो यदि कोई परेशानी अगर,, तो बेझिझक उससे मै कह सकूँ,, दरमियाँ हमारे बातों का ना ही कोई पहरा हो,, साथ हमारा कुछ इतना यु गहरा हो,,!!
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