बिखरे ख्वाब
कि अब तो आसूं भी सूख गए । रात के अंधेरे में दिल से निकल के आंखो में ऐसे चुभे कि नींद घबराकर भाग गई । तुम्हारे दिए गए जुल्म दिमाग से उतर के शरीर से ऐसे झलकते कि मुस्कुराहट भरी सासें उनका दर्द नही छुपा पा रही ।
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