नव वर्ष
घने कोहरे की चादर लपेटे बीत गई साल की अंतिम रात, बदलो में लुका छिपी खेलते सितारो की तरह भूल जाते है पुरानी बात, कोहरे को चीरती सूरज की किरणों सी दिल में संजोएंगे कुछ नई याद, पत्तो पर ओंश की बूंदों की तरह पकड़कर एक दूजे का हाथ, फूल और तितली की तरह बना रहे अपना साथ, एक नई कली के जैसे नव वर्ष में करते है एक नई शुरुवात । कड़ाके की सर्दी जैसी शायद मेरी कुछ बाते आई ना हो आपको रास, सर्दी के बाद बसंत जैसे नव वर्ष में सब अच्छा रहेगा करता हूं ऐसी आश, सर्द हवाओं में अलाव जैसे, हो कुछ ऐसा ये साल बने कुछ खास। तू और मैं ऐसे जैसे रानी और राजा वाली ताश, खालियानो में ठिठुरते खेतिहार जैसे ईश्वर से एक ही अरदास, दिया और बाती जैसे दुख और सुख के लम्हों में आप रहे सदा मेरे पास।
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