स्वभाव
घाट-घाट का अनुभव लेकर बहती ये जीवन नदिया निरंतर विनय सिखा दिया अनुभवों ने हँस देता हूं उकसावे पर अक्सर । नहीं फंसना मुझे इस भंवर जाल में तीव्र गति शोर के इस क्षद्म संसार में हम शांत सौम्य और सरलता से बहेंगे हमें पता कहाँ जाना और कैसे जाना है। मुझे आजमाना छोड़ दो राह में रोड़े अटकाना छोड़ दो मुझे बाधाओं में बहना आता है प्रतिकूलता में हंसना आता है। मुझे दुख होगा कि तुम्हारे प्रयास निष्फल हुवे तुम्हारे ऊर्जा का दुरुपयोग विकार उत्पन्न हुवे तुम हल्के में लेना छोड़ दो मुझे छेड़ना छोड़ दो हम तो मिलेंगे सागर से तुम्हारे संकल्प अपूर्ण हुवे।
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