बदलते रिश्ते
युग बदला समय बदला बदली रिश्ते की परिभाषा, अब तो रिश्ते के नाम पर मिलता है सिर्फ झांसा, एक समय था जब रिश्ता सबसे ऊपर जाना जाता था, भूल कर निज स्वार्थ जब रूठों को मनाया जाता था, अब तो देखो बदल गए हैं रिश्तों के भी नाम, दोस्ती,अपनापन,प्यार,लगाव सब हो गया बदनाम, ऐसे विकट समय में भी यदि कोई साथ निभाता हो, निज स्वार्थ त्याग मतलब विहीन रिश्तों का फर्ज निभाता हो, ऐसे रिश्तों की कदर करें तज बेहतरीन की आशा, वरना पीछे पछताने से कुछ भी तो हाथ ना आता, सौरभ विनती कर सुनाता बस यही संदेशा, युग बदला समय बदला बदली रिश्ते की परिभाषा.!!
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