मेरी दुनिया
चलो आज किसी और का नहीं खुद का जीकर करता हु । आज मैं अपनी सारी खामियां कबूल करता हु , माना मैं बहुत जिद्दी हु और सब से लड़ता हु । पर किसे पता कि मैं अंदर से कितना टूटा हुआ हु।, किसे पता मैं कितना अकेला महसूस करता हु , बेफिक्र हु पर अपनो का बहुत फिकर करता हु । अब किसी पर क्या खुद पर यकीन नहीं कर पाता हु । अब और क्या ही बताऊं अपने बारे में दिन भर हंसता रहता हु ।, रोना चाहूं फिर भी रो नहीं पाता हु । by pankaj kumar sharma
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