अलविदा
बरसों से निभाते तनाव के रिश्तों को हम जकड़कर पीछे छोड़ आए। आसुओं की नदी बहाकर उसी की किनारे अपना बसेरा बना लिया। दर्द के नींव पर चढ़के अपनी सफलता का मुस्कुराते हुए ऐलान किया।
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