परिचय -सम मात्रिक दंडक
प्रति पंक्ति--44 मात्रा पदांत- तगण (221) यति-- 12, 10,12,10 शीर्षक-- जगत है रंगीन हँसते जीवन बीते, उर कभी न रीते, भूलो सभी दुखों को, नहीं रहना हीन। ईश्वर दिया वरदान, इस धरा को मान, ऑंखें खोलो देखो, जगत है रंगीन।। रहना कभी न उदास, रहे मन उल्लास, रोना-धोना समझो, अपराध संगीन। प्रभु पर करो विश्वास, रखो उनसे आस, ईश प्रदत खुशियों में, रहो तुम तल्लीन।। नरेंद्र सिंह,06.06.2025
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